Friday, February 14, 2020

Hindi shayari 2020


मैं भी क्या कमाल करता हूँ
एक शाम लिखता हूँ
कि भुला दिया तुझे
और फिर रात भर तुझे याद करता हूँ


कौन कहता है कि दूरियां हमेशा किलोमीटरों में नापी जाती है
कभी कभी "ख़ुद" से मिलने में भी "जिंदगी" गुज़र जाती है



लोग अक्सर पूछते है हमसे क्या गम है तुम्हें जो शायर बन गए हो ! हम मुस्कुराकर केहते है "हर ग़मो का मारा ही शायर नहीं होता ज़नाब हमें तो ख़ुदा ने बक्सा है  हुनर स्याही का कलम चलती है और दिल से अल्फ़ाज़ निकलतें है जो बनके हमारे जज़्बात काग़ज़  पर उतरते है" !

Sambhaal Lena
Maa Baap ko Unke
budhaapey main,
Jo bachpan se Tera
Har girta kadam
Sambhaalte aaye hain.


बांध कर वह हाथ रब से कर रहा था प्रार्थना|
था नगर का सेठ लेकिन कर रहा था याचना|

है प्रभो जो प्लाट पाया है शहर के बीच में|
आप कर दो बस दया तो हो करोड़ो दाम ना|

खेत गिरवी रख गया था एक ग्राहक सूद में|
ब्याज में ही मै खरीदूं काम ऐसा साधना|

हो परम वैभव सदा ही आपके आशीष से|
हो ज़रा जितनी मिले सब मेरी झोली डालना|

यही गुज़ारिश है दीवाने की ऐ ज़िदगी अगले जन्म में मिलना  फुर्सत से जियूंगा तुझे जी भरके! दी है तूने  खुशियाँ इस जन्म में भी पर अफ़सोस है के  जी ना पाया में तुझे बाहों में भरके !


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आज मैने इंसानियत को होते तार-2 देखा,
एक मासूम को तड़पते सरे बाजार देखा।

नन्हीं आँखों में सवाल कई भरे थे,
होंठो पर मगर ताले जडे थे।

मायूसियाँ उसकी कलेजे पर घात कर रही थी,
खामोशियाँ उसकी मुझसे बात कर रही थी।
क्यूँ समझते हो 'मै' जन्मा हुँ किसी सड़क पर,
अरे! लाडला था मैं सबका,बेठता था पलक पर।


मुफ़लिसी

दिन वो आज भी  मैं नही  हुँ भुला,
उस दिन पार्क में मैं  झूल रहा था झूला।
किसी अंजान ने प्यार से टॉफी खिलाई,
आओ साथ मेरे मैं पापा का चचेरा भाई।

मंजर अब सभी बदल गए थे,
उस गंदे कमरे मे बच्चे कई खडे थे।
पेट बाँध कर मैं कई दिनों तक था सोया,
हाय!याद मे घर की फूट-2 कर था रोया।

फिर शहर की गली में मुझको छोडा गया,
मासूमियत से मेरी ,पैसा बहुत जोडा गया।

कैसे कह दूँ ,
आपकी दी भीख का मैं  आभारी नहीं हुँ,
मैं एक माँ से बिछुडा,
जिगर का  टुकडा,  मैं भिखारी  नहीं हुँ।।

              ✏️सनिता ठाकुर🇮🇳



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